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Batch 1965

उतारो - चढाओं, नये और पुराने का संगम है भोपाल  । भोपाल  कि अपनी तहजीब अपनी विरासत और अपनी एक अदा है खुशनसीब हैं है लोग जिनको गांधी मेडिकल कोलिज भोपाल में दाखिला मिला 1965 का बेच रंग-बिरंगे लोगो का समूह था । इस बेच में पढाकू पंडित, महापंडित और हरफनमौला सभी तरह के लोग थे । इनलोगो ने गांधी चिकित्सा महाविद्यालय की परम्पराओं का निर्माण किया। जब वे  अपने कार्य क्षेत्र मे गये तो सभी स्थानो पर उन्होंने अपनी पहचान भी बनाई काश्मीर से कन्याकुमारी तक के लोग अगस्त 65 में एडमिशन के लिए आये थे। डेविड , सलीम सउर इराक से आया था। लालसिंह  पाल शिमला से, काश्मीरी पंडित रत्ऩा नेहरू और क्षेमा मुन्सी काश्मीर श्रीनगर से आये । अनवर मोहम्मद खान, इरफान और लहक बरई काट भोपाली थे । गार्गव , बिल्लोरे, चौरे नर्मदा के तट पर रहने वाले नारमदीय ये । जयंत वसा काठियावाड़ गुजरात से आया था । एलपी. सिंग, सरगुजा के सुदूर अऱदिवासी इलाको से और पामेचा जैसे हैंडसम लोग अफीम पैदा करने वाले इत्नाके रतलाम  से आये थे । आर के गोयल, रघुवंशी एमएस यादव, जौहरी विदिशा रो, एमसी. जैन, टींएमसिंग, जिन्दा, संतोष व्यास  भी भोपाल के आसपास के इलाको से थे । यह बेच एक मिनी भारत था । एब्यूनी के सम्मेलन में कई लोग मिले। ए जी मालपे ,सविता मीरचंदानी , रत्ऩा नेहरु, क्षेमामुंशी, बीना गुप्ता, लीलारामानी ,फरजाना फैयाज, ईस्मत खातून, सौलत, दिलीप रानाडे  वगैरह जब एक बार गये तो आज तक नही मिले। बेच में नेहरू, गांधी, जिन्ना भी थे उनसे भी बाद में मुलाकात नहीं हुई गांधी मेडिकल कॉलेज की एक अलग दुनिया थी ज्यादातर  लोग हास्टलर थे प्रथम वर्ष के छात्र 'सी ब्लाक' में रहते थे। डॉ. चौरसिया उन दिनों "सी ब्लाक " के असिस्टेंट वार्डन थे। उस जमाने में डॉ चौरसिया एक डायरी में एनाटामी के नोटस बनाया करते थे। कालान्तर  में उनकी यही डायरी एनाटामी की मराहूर किताब के रूप में प्रकाशित हुई होस्टल के पीछे भोपाल की बडी झील है । उस जमाने के चीफ सेक्रेटरी आर सी वीपी. नरोन्हा हमारे हॉस्टल के सामने एक छोटे  बंगले में रहते थे। है बहुत ज्ञानी लेकिन सरल व्यक्ति थे । फुरसत के समय बडे तालाब की एक गुमटी पर बैठकर मछली मारा करते ये

नरोन्हा की याद इसलिए भी आती है क्योकि उनकी संवेदनशीलता और प्रशासकीय सूझबूझ के कारण शासन के स्तर पर जूनियर डाक्टरों की पीड़ को पहली बार समझा गया ।उन्हें को  नरोन्हा समिति ने इन्टेन हाउस सर्जन और रेसीडेन्ट डाक्टरों के स्टाइपंड बढाये । जुनियर डाक्टरों की लडाई में 1965 बेच की यह बहुत बडी उपलब्धि थी । डाँ दल्ला का कहना है कि -1970 में हमारा बेच पास हुआ । 1974 में हमने इन्टर्न ऐसोसिएशन बनाया  । 1972 में हाउस सर्जन ऐसोसिएशन और 1973 में जैडीए बना, जिसका उल्लेख  हम अगले लेख में करेंगे अखिलेश जौहरी, रेणु र्कपीहन बगैरह  बेडमिन्टन के अच्छे खिलाडी ये । नीरा भार्गव, रमेश चन्द्र शर्मा, केके. शोरे, किरण प्रह्लाद आदि लोगों को डॉ. इन्द्र भार्गव (प्रोफेसर एनाटामी) पण्डित और महापंडित  कहा करते ये क्युकी  ये लोग पूरे पाँच साल मेरिट लिस्ट में रहे  । 

अकादमिक क्षेत्रों के अलावा एक्सट्रा केरीकलर एक्टीविटीज में भी यह बैच अग्रणी था जोहरी महाबिदृयालय का बैडमिंटन में प्रतिनिधित्व कश्ता था । एलपी. सिंह अच्छे खिलाडी थे। वे फोटोग्राफी और एरट्रोलॉजी के शौकीन थे। कोमल हाथों की रेखायें पढ़ना उन्हें अच्छा लगता था। गोपाल में एलपी. सिंह के छाया चित्रो  की एकल प्रदर्शनी का आयोजन जिया गया। वर्ष 2009 में बैंगलोर में आयोजित अंतर्राष्टीय मेडिकल फोटोग्राफी सम्मेलन में डॉ. एल पी. सिंह को नौ में से छह: पुरस्कार प्राप्त हुए । एल पी सिंह एच इं एल. से सेवानिवृत होकर भोपाल में दाद-खाज खुजली और गुप्त रोगों के विशेषज्ञ है 1965 बेच के लोग आज उंची उंची जगहो पर है । दूर-दूर है । लेकिन अपनी जड़ो से जुडे हुए है । भूतपूर्व छात्रों के सम्मेलन में हम इसकी झलक देखते है । रंग बिरंगे इस बेच के लोगो ने अपनी ध्वज  पताका जगह-जगह फहराई है। डॉ. रमेश शर्मा, एयर इंडिया के मुख्य चिकित्सा अधिकारी बने और अब वे मुंबई के नानावटी
अस्पताल  में मेडिकल स्पेशलिस्ट  हैं । डॉ. दिलीप विप्पट, मुंबई के मझगॉव डाक यार्ड के मुख्य चिकित्सा अधिकारी के रुप में सेवानिर्वित हुए । संतोष गोविला, एन. पी. वर्मा, एन एन दुब्रे, नीरा भार्गव और चन्द्रकान्त शर्मा शार्ट सर्विस कमीशन लेकर सेना में भरती हुए कप्तान  चन्द्रकांत शर्मा ने भारत-पाक युद्ध  के समय दिनांक 10 दिसम्बर 1997 एवं 24 दिसम्बर 1997 को शंकरगढ़ क्षेत्र के युदृध के मैदान में अपनी जान की परवाह न करते हुए गोलियों की बौछार के बीच युदृध के मेदान में जाकर अपने जवानों को न सिर्फ प्राथमिक उपचार दिया अपितु उन्होंने हत्ताहतों को वापस लाने का अभूतपूर्व कार्य भी किया 
उनकी उच्चकोटि की वीरता, ढृढ़ निश्चय और कर्त्सव्य परायणता के लिए महामहिम राष्ट्रपति ने उन्हें वीर चक से सम्मानित जिया कुछ लोग अकादमिक क्षेत्रों ने गये विजय पंडया इस बेच का सबसे सीधा साधा  लड़का था । वह राजधानी भोपाल के सबसे बडे हमीदिया हस्पताल का अधीक्षक बना । अब डॉ पंड़या भोपाल के पीपल्स मेडिकल कॉलेज में डीन हें। मोहन दुबे पीजीआई चंडीगढ़ में पैरासोसाटोलाजी का प्रोफेसर है। बीना वरीहोक (एनाटमी) और सुभाष देवगन (मेडिसिन) दिल्ली में प्रोफेसर है । डा सुशीला  गौर भोपाल में फिजियोलॉजी और छाया गांगुली (अब बेनर्जी) रायपुर मेडीकल कॉलेज में एनाटामी की प्रोफेसर है, छाया गांगुली बहुत अच्छी गायक और रंगमंच कलाकार थी वे अब भी उतनी ही सरल और सौम्य हैं। किरण प्रहलाद अच्छी वायलिन वादक थी । डॉ. कं. पी. दुबे रायपुर मेडिकल कालेज में एनेस्थिसिया के प्रोफेसर है । किरण प्रहलाद (अब किरण दुक्खू ) पहले रायपुर और अब भुवनेश्वर के मेडीकल कॉलेज के फिजियोलॉजी  विभाग की विभागाध्यक्ष है । वह अब भी पेंटिंग बनाती है । वायलीन बजाती है । और रोज सुबह उठकर सबसे पहले गली के कुत्तो  को अपने हाथ से रोटी बनाकर खिलाती है । वे हमारे बेच की मेडम डिमेलो है । उनके नेतृत्व में गौतम सिंह अतरम, जाफरी, बिल्लोरे, रुकसाना सिद्दीकी, छाया गांगुली के. के. चौरे चंद्रकांत शेल टंडन आदि ने अच्छे ड्रामा खेले । बीपी. जैन का स्टेचू  प्रसिद्ध था । वो जब पीतल और कांस के रंगों में गांधी की मूर्ति बनकर मंच पर अविचल खड़ा हो जाता था तो (ऑडिटोरियम तालियों की गड़गडाहट से गूँजने लगता था । शैल टंडन (अब गोविल) बहुत मिलनसार और एक अच्छी रंगमंच कलाकर थी । उसके पिता श्री प्रभुनारायण  टंडन मप्र शासन के मंत्री थे । शेल गोबिला आज कल  मेडीकल कॉलेज भोपाल मे रेडियोलोजी क्री प्रोफेसर है । शेल आज भी उतनी ही खुशमिजाज और सक्रिय है। आर के पटेल, सुदामा मित्तल गोपाल शर्मा आदि मुख्य चिकित्सा अधिकारी है
देवचंद सुनाना और कुंदा नाफडे की पंजा कुश्ती प्रसिद्ध थी । कुंदा नाफडे , अनवर मोहोम्मद खान, साजिदा सुल्लान, लईक वगेरह मिडिल इस्ट में बहुत अच्छी पोजीशन मे है । ये सब रजत जयंती  समारोह में आये ये । अनवर अब भी उतना ही शेतान है । उसने सिल्वर जुबली में सब पर शेर पढे थे। अखिलेश जौहरी, सविता मीरचंदानी  अमेरिका में है। अखिलेश आज कल एक जाना माना सर्जन है दिलीप अक्विला लंदन के पास एक पांच सितारा अस्पताल का मालिक है। उसकी शादी सुषमा  धरंगधारिआ  से हुई। दोनो की सुंदर जोडी है उनको पुराने दोस्तों से आज भी बहुत लगाव है और वे बिना  नागा ओल्ड बॉयज फंक्शन  के लिए लंदन से आते हैं

सुषमा अक्विला ने  भोपाल गैस ट्रेजेडी पर अंततराष्ट्रीय संघठन के लिए महत्पूर्ण अध्यन अवं प्रकाशन किये है  दिलीप रानाडे अमेरिका,देशराज मलिक लंदन और मसूद दुबई में थे  । तीनो दो आसामयिक  मृत्यु हो गई । राजकुमारी जैसी राजकुमारी चोपडा कुछ वर्ग पूर्व एक बिजली करेंट के हादसे में हम लोगो को छोड़ गई । ए. कं. मोदी  एमसी जैन मृदुला श्रीवास्तव, गौतम सिंह अत्तरम ,राजूरकर विजय सक्सेना, विष्णु दुबे, पी के. बिल्ले, एच. सी. सिह ए.के.मोदी, खेमा मुंशी, शोभा शुक्ला  आदि मित्र अब इस संसार में नही रहें । एमसी. जैन "मच्छु " गोल्डन जुबिली में सपरिवार आया था । कितना  चहकता था । गुर्दे की खराबी से एक लंबे अर्से तक लड़ते-लड़ते सो गया, न जाने, कहा खो गया । कहते है - ईश्वर को जो ज्यादा प्यारे होते है … ईश्वर उनको पास  बुला लेता है वे सचमुच बहुत प्यारे लोग थे । उनकी याद में श्रद्धांजलि  के रूप में एक विशेष  पेज इस पत्रिका में समर्पित है रेणु कंप्रीहन सबसे सुंदर थी। अब भी है। सबसे पहले  उनकी शादी हो गई । आज  कल दिल्ली की जानी मानी सोनोलॉजिस्ट है गोगिया  बरेली में है डाक्टर के रूप में वे वहां पूजे जाते है । मस्तमौला सत्तोष गोविला मिडील इस्ट से बहुत पेसे कमा कर भोपाल में सेटल हो गया है । वह भोपाल का जाना माना नेत्र चिकित्सक है।

दल्ला (रायपुर), आर पी तिवारी (गंज यशोदा),आर के गोयल (अशोक नगर) , बी जी ब्यास (पिपरिया) जायसवाल, पामेचा आदि ने अपने नर्सिग होम बना लिए हें। केसी. पाठक रतलाम  में मुख्य चिकित्सक्व अधिकारी और सिविल सर्जन रहे। अब है सेवानिवृत होकर अब अच्छे जाने माने चिकित्सक के रूप में प्रायवेट प्रेक्टिस कर रहे हैं । आर. के. गोयल जब सिलवर जुबिली प्रोग्राम (1990) में जब आया था तो उसके सिर के पूरे बाल चाँदी के ये । बेच की  किसी लड़की ने उसे छेड़ दिया तो जब 2010 में मिला तो उसके पूरे बाल काले थे । वह अब भी उतना ही सरल व सहज है।  डॉ दल्ला, एक सुंदर व्यक्तित्व के धनी हैं। वे अच्छा बोलते, अच्छा सोचते और अच्छा लिखते हैं । छात्र जीवन में उन्होंने जबलपूर विश्वविधालय  के अंतर विशवविद्यालीन  वाद-विवाद प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त जिया । एम. वी एम. कालेज, भोपाल में आयोजित (अंतरमहाविद्यालीन  स्वरचित कविता पाठ  में भी उन्हें प्रथम पुरस्कग्रर प्राप्त हुआ । हरिशंकर परसाई और शरद जोशी जैसे निर्णायकों ने उनकी कवित्ताओं की प्रशंसा की। कालान्तर में है जूनियर डपैक्टर एसोशिएशन, म.प्र. मेडिकल आँफिसर ऐसोसिएशन और म.प्र. नर्सिग ऐसोसिएशन कि प्रादेशिक अध्यक्ष भी बने छस्तीसगढ़ बनने के बाद वे छत्सीसगढ़ राज्य की रेडक्रॉस सोसायटी के प्रादेशिक चेयरमेन नियुक्ति हुए । सिकल सेल रोग नियंत्रण कार्यकम पर उन्हें अंतरराष्ट्रीय  ख्याति प्राप्त हुई । सिकल सेल विकृति पर लिखी उनकी पुस्तक का विमोचन गतवर्ष भारत के भूतपूर्व राष्ट्रपति महामहिम ए.पी.जे. कलाम ने लिया । वे रायपुर मेडिकल कॉलेज की एथीकल कमेटी क चेयरमेन तथा छस्तीसगढ़ हार्टीकल्चर सोसायटी के अध्यक्ष भी हैं

डॉ एन. डी. गार्गव छात्रकाल में कॉलेज युनियन के महासचिव थे। उनके कार्यकाल में कॉलेज केंम्पस में पोस्ट-आँफिस, बेंक और इंडियन कॉफी हाउस की स्थापना हुई। गांधी मेडिकल कॉलेज की गोल्डन जुबिली समारोह की  समिति के वे अध्यक्ष थे। वे अपने दोस्तों के लिए समर्पित हैं । गोल्डन जुबिली में देश विदेश से भूतपूर्व छात्र आये थे … सबने गार्गव की संगठन क्षमता की तारीफ की। डॉ  गार्गव, ईएनटी (पीएचडी) के प्रोफेसर है। वे उज्जैन मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर और बाई शैक्षणिक संस्थाओके संचालक मंडल में  है